कोरोना के साथ रहने का तरीका

कोरोना के साथ रहने का तरीका

ये कोरोना युग है। अभी युद्व कोई आदमी का आदमी से नही या किसी देश का देश से नही ये युद्ध ऐसे दुश्मन से है जो न दिखने वाला एक एक कोशीय विषाणु से।
ये युद्ध किसी भी युद्ध से महानतम होनेवाला है। इस एक कोशीय विषाणु के साथ जीना पड़ेगा अपनी आदत रहन सहन खान पान बदलना पड़ेगा।
ये सोचना बंद करना पड़ेगा कि मुझे ये विषाणु संक्रमित नही करेगा या दूसरे को भी नही जिससे हमारा रिश्ता या स्वार्थ है यदि नही किया तो इस युग मे रहना ही मुश्किल हो जाएगा।
अतः अब जीने के तरीके को बदलना पड़ेगा जैसे चेहरे पर मास्क लगाना, हाथो को sanatize करना, साबुन से हाथ धोना , दूसरे से दूरी रखना कोई भी समान रुपिया लाने या लेने से पहले sanitise करना पड़ेगा।
हुम् तभी इस दुश्मन के आक्रमण से बच पाएंगे।
लोगो को लगता है इसका टीका बन जाये तो लोग बच जाएंगे ऐसा  हम भी चाहते है पर इसका टीका बनने के बाद बच्चो ,वयस्क एंव वृद्ध लोगो को ये टीका बिना कोई नुकसान किये काम करेगा इन सब बातों को परखने के लिए बहुत लंबा समय लग सकता है तब तक हमे इस घातक विषाणु के साथ रहना सीखना पड़ेगा। 
जितने वायरस होते है वो पूर्ण कोशिका नही होते।आप ने सुना है HIV AIDS ,हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी ये भी कोरोना वायरस की तरह वायरस है लेकिन इसकी ब्लड टेस्ट के द्वारा पता किया जा सकता है पर कोरोना को नही ऐसा क्यों? ये swab से टेस्ट किया जा रहा है कारण ये खून में टेस्ट करने पर पकड़ में नही आते।  कारण ये हमारे शरीर के गले या नोस्ट्रिल में रहते ओर पनपते है।कुछ और बातो में ये अन्य सभी वायरस से अलग है। जैसे ये शरीर मे तेज बुखार, श्वास लेने में तकलीफ, सूखी खांसी जैसी तकलीफ पैदा करता है, ओर सबसे भयानक ये अपने मेहमान कोशिका के साथ मिलकर अपनी वृद्धि बहुत जल्दी जल्दी करता है इसलिये ये घातक है। अभी दो प्रकार के रोगी मिलते है एक लक्षणों वाले दूसरे बिना लक्षणों वाले।जिनके शरीर मे रोगप्रतिरोधक क्षमता ठीक है उनमें इस विषाणु के संक्रमण के लक्षण नही मिलते।ये हमारे खून के थक्के बनाकर फेफड़ो में इकट्ठा करता है यही सबसे जटिल बात है।हमलोगों ने रिसर्च में पाया कि आधुनिक विज्ञान के पास खून को पतला करने की बहुत सी दवाइया है लेकिन खून के थक्के को तोड़ने ओर वापिस खून में घुलने की दवा नही है।
जिन लोगो को दमा,गुर्दा, मधुमेह,हृदय संबंधी रोग है या वृद्ध हो उनको बड़ी सावधानी रखनी चाहिए।उनको ये वायरस बहुत जल्दी संक्रमित कर सकता है अतः उनको हमेशा ये समझकर उचित दवा और सावधानी रखनी चाहिए । कम से कम बाहर जाना चाहिए औऱ जाना भी पड़े तो विशेष सावधानी बरतना चाहिए।
अतः इलाज या बचाव दोनो के लिए दो तरह की दवाई चाहिए एक जो वायरस को मारे दूसरा जो इस वायरस के थक्के को तोड़कर खून में मिला दे। 
आयुर्वेद में वायरस की दवाई भी है और वायरस द्वारा निर्मित थक्के को घुलनशील करने की भी।

हमारा एक उत्पाद Dr Thanki's Immune Booster ये किसी भी प्रकार के वायरस को मारने में अत्यंत प्रभावी है।
हमारा एक दूसरा प्रोडक्ट है Dr T hanki's DVT Protector Add On Vitaliser है ये किसी भी थक्के को घुलनशील करने में अत्यंत प्रभावी है।
चूँकि हमको ये समझ कर चलना होगा हुम् कोरोना से संक्रमित है अतः कोई भी ऐसी दवाई को हमारे जीवन का अंग बनाना पड़ेगा तभी हम कोरोना युग मे जी पाएंगे।
बासी , बाज़ारू भोजन से परहेज करना पड़ेगा और पौष्टिक भोजन करना पड़ेगा।
तो कोरोना के साथ रहने का ये फार्मूला है ।
विशेष: ये वायरस लाइपोप्रोटीन लेयर के बाहरी आवरण से ढका है जो फैटी एसिड से निर्मित होता है अतः आप सभी को बतलाये की घर मे मिलने वाला मिट्ठा सोडा को गुनगुने पानी मे मिलाकर गरारा करे। कम से कम दिन में दो बार ताकि अगर किसी भी वजह से संक्रमण हुआ है तो प्रारम्भ में ही इसका उपचार हो जाये।
मीठा सोडा यानी सोडा bi carb
जनहित मे जारी। 
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