अर्थराइटीस (Arthritis), जोड़ो का दर्द, घुटने का दर्द

अर्थराइटीस (Arthritis), जोड़ो का दर्द, घुटने का दर्द

अर्थराइटीस (ARTHRITIS), जोड़ो का दर्द, घुटने का दर्द  
 

प्राय: देखा जाता है की कुछ सालो के बाद जैसे-जैसे इंसान जवानी से बुढ़ापे की तरफ अग्रसर होता है उसके जोड़ो में दर्द होने लगता है। 
विज्ञान में अनुसंधान करने पर पता चला की मनुष्य के शरीर में पाचन के बाद जो टॉक्सिक पदार्थ किडनी से बाहर नहीं निकल पाता अथार्त यूरिक एसिड की मात्रा खून में बढ़ जाती है फलस्वरूप मनुष्य के जोड़ों में दर्द होने लगता है। 

60 वर्षों की आयु के बाद ये तकलीफ और बढ़ जाती है तथा जोड़ों में दर्द के साथ अकड़न भी होने लगती है। विशेष रूप से ये दर्द घुटने या कमर में सबसे ज्यादा होता है। 

इस उम्र में घुटनों में तथा अन्य जोड़ों पर सूजन आने लगता है कभी-कभी ये दर्द असहनीय भी हो जाता है। औरतों में जवानी में श्वेत प्रदर या रक्त प्रदर की बीमारी आम होती है। ये बामारी भी भविष्य में जोड़ों के कारण बनती है। 

कच्चे आलू का जूस कुछ हल्के व्यायाम, ज्यादा खट्टा भोजन न करना, दाल, पनीर आदि सेवन कम करने से भी रोगी को थोड़ा बहुत आराम मिल जाता है। 

 

हमारे सम्पर्क में जो वृद्ध आते है वो इस बीमारी से जरूर ग्रसित होते है। प्राय: देखा गया है की पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में ये लक्षण ज्यादा पाए जाते है। 

 

स्त्रियों में हड्डी बनने की प्रक्रिया भी क्षीण होने लगती है भौतिक रुग में शरीर को धूप कम मिलती है फलस्वरूप विटामिन डी की कमी भी हो जाती है ये भी एक प्रमुख कारण है इस प्रकार की तकलीफों के लिए। 

हाल के वर्षों में देखा गया की ये बिमारी नवयुवक और नवयुवतियों में भी पायी जाती है। 

भौतिक संसाधन पाने की ललक में नए पीढ़ी की जिंदगी आपाधापी से भरी है।  इस प्रकार की भाग दौड़ भरी जिंदगी में भौतिक संसाधन जुटाने के लिए व्यक्ति न तो व्यायाम करता है न अपने शरीर का समुचित ध्यान रखता है 

घर के सुपाच्य एवं सात्विक भोजन को छोड़कर वो बासी भोजन, झटपट व्यंजन, जंकफूड की तरफ आकर्षित होता है ये भोजन शरीर में विषैले तत्व अत्यधिक मात्रा में बनाते है। 

इसका उतसर्जन गुर्दे द्वारा समुचित रूप  से नहीं होने के कारण कम उम्र में ही ऐसे जटिल बीमारियों से ग्रसित  हो जाता है। 

जैसे जैसे मनुष्य वृद्धावस्था की तरफ अग्रसर होता है उसके शरीर की मासपेशियाँ भी कमजोर होने लगती है। 

हमारी कम्पनी के अनुभवी अनुसंधानकर्ताओं ने इस जटिल बिमारी के लिए दवाई का निर्माण किया है।  डॉ थानकी अर्थराइटिस कैप्सूल ये जोड़ों के सूजन को कम करता है विषैले तत्व भी शरीर से बाहर निकालता है। 

हमारे इस उत्पाद के युग्म के रूप में डॉ थानकी रतिप्रिया आयल है ये शरीर मांसपेशियों को मजबूत करता है। 

कुछ माह के सेवन से इस प्रकार के जटिल समस्या से निदान पा सकते है। 

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